पंक्ति 5: पंक्ति 5:
 
<div style="text-align:center; direction: ltr; margin-left: 1em;"><font color=#003333 size=5>अब मुस्कुरा दे<small> -आदित्य चौधरी</small></font></div>
 
<div style="text-align:center; direction: ltr; margin-left: 1em;"><font color=#003333 size=5>अब मुस्कुरा दे<small> -आदित्य चौधरी</small></font></div>
 
----
 
----
{| width="100%"
+
<center>
|-valign="top"
+
<poem style="width:360px; text-align:left; background:transparent; font-size:16px;">
| style="width:35%"|
+
| style="width:35%"|
+
<poem style="color=#003333">
+
 
आँखें बंद कर ले 
 
आँखें बंद कर ले 
 
कि मैं तुझसे  
 
कि मैं तुझसे  
पंक्ति 44: पंक्ति 41:
  
 
</poem>
 
</poem>
| style="width:30%"|
+
</center>
|}
+
 
|}
 
|}
  

16:04, 5 अगस्त 2017 के समय का अवतरण

Copyright.png
अब मुस्कुरा दे -आदित्य चौधरी

आँखें बंद कर ले 
कि मैं तुझसे
खोलने के लिए कहूँगा

ज़रा चुप भी हो जा
कि मैं तुझसे
बोलने के लिए कहूँगा

रूठती क्यों नहीं
जल्दी रूठ
कि तुझे मनाना है

अब मुस्कुरा दे
तुझको रुलाना है

सो क्यों रही है
जल्दी उठ
भूखा ही मरूँगा क्या
खाना नहीं बनाना है

चल कपड़े तैयार कर दे
मुझे नहाना है

जा दूऽऽऽर चली जा
कि तुझे आवाज़ देकर बुलाना है
अरे इतनी भी दूर नहीं
क्या सचमुच मुझे छोड़कर जाना है

अब ज़रा पास आ
तुझे कुछ बताना है
कि ये जो घर है ना अपना
इसे तुझी को तो मंदिर बनाना है


सभी रचनाओं की सूची

सम्पादकीय लेख कविताएँ वीडियो / फ़ेसबुक अपडेट्स
सम्पर्क- ई-मेल: adityapost@gmail.com   •   फ़ेसबुक