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<div style="text-align:center; direction: ltr; margin-left: 1em;"><font color=#003333 size=5>क़ायम सवाल रहता है<small> -आदित्य चौधरी</small></font></div>
 
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कोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता है
 
कोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता है
 
कोई आए ही क्यों, क़ायम सवाल रहता है
 
कोई आए ही क्यों, क़ायम सवाल रहता है
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इसी को सोचकर शायद बवाल रहता है  
 
इसी को सोचकर शायद बवाल रहता है  
 
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19:59, 3 अगस्त 2017 के समय का अवतरण

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क़ायम सवाल रहता है -आदित्य चौधरी

कोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता है
कोई आए ही क्यों, क़ायम सवाल रहता है

          किसी उदास से रस्ते से उसकी आमद को
          ये मिरा दिल भी तो बैचैने हाल रहता है

नहीं कोई ज़ोर ज़माने का मेरी हस्ती पर
इसी ग़ुरूर में बंदा मिसाल रहता है

          हमारे इश्क़ को हासिल है किस्मतों के करम
          गली के मोड़ पर हुस्न-ए-जमाल रहता है

यूँ ही मर जाएंगे, इक दिन जो मौत आएगी
इसी को सोचकर शायद बवाल रहता है


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